संध्या को लेकर बिरादरी में गिरने लगी है नेताजी की साख

यादवों में गिरने लगी है सपा सुप्रीमो की साख (10/22/16) आलोक कुमार नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी में जारी पारिवारिक कलह से अब सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की जातिगत (यादव) समर्थक नेताओं के बीच भी साख गिरने लगी है । बात 77 साल के बुजुर्ग मुलायम सिंह यादव की पत्नी साधना गुप्ता के यादव कुल से नहीं होने की वजह और सुप्रीमो के दबाव में आकर लिए हालिया फैसलों के प्रचारित होने की वजह से बिगड़ने लगी है। मुलायम सिंह के मजबूत समर्थक औऱ गेस्ट हाउस कांड के अहम् किरदार रहे राज्यसभा के एक सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सिर्फ समर्थक और मतदाता ही नहीं बल्कि समान जाति के हम नेतागण भी “नेताजी” के व्यवहार से परेशान हैं। सुप्रीमो से खफा होकर यादव समुदाय में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रति अचानक से सहानुभूति बढ़ने लगी है। ऐसी हालत में पार्टी में किसी विभाजन की स्थिति में सीधा फायदा सौम्य छवि पेश करने में सफल रहे युवा अखिलेश यादव को मिलने वाला है। समाजवादी पार्टी के जातिगत सांसद व विधायकों में नाराजगी इस कदर बढ़ी है कि अलग पार्टी बनने की नौबत में सपा सुप्रीमो के ज्यादातर पुराने सिपहसलार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को नेता कबूल करना पसंद करेंगे। अगर दिल्ली की संसदीय राजनीति की बात करें, तो सांसद पत्नी डिंपल यादव के पति अखिलेश के विराग का कोई सवाल तो हैं ही नहीं उनके अलावा सपा सुप्रीमो के भाई प्रो. रामगोपाल यादव और भतीजे धर्मेन्द्र यादव ने अखिलेश के साथ होने की बात पहले से ही साफ कर रखी है। इससे परिवार में भी अखिलेश का पलड़ा ही भारी नजर आ रहा है। हालिया फैसलों से बुजुर्ग मुलायम सिंह यादव के पत्नी साधना गुप्ता के हाथों की कठपुतली बनने की खबर सत्य होती प्रतीत होने लगी है। सुप्रीमो की पत्नी के “कैकेयी” की भूमिका में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को 2012 से निरंतर नेताजी के हाथों परेशान करने की बात सामने आने लगी है। साधना गुप्ता समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता के तौर पर मुलायम सिंह यादव के करीब आई थी। इनकी शादी कब हुई इसका ब्यौरा उपलब्ध नहीं है। लेकिन साधना गुप्ता से पुत्र प्रतीक यादव के जन्म का वर्ष 1988 है। मुलायम सिंह ने लंबे वक्त तक सार्वजनिक तौर पर साधना गुप्ता के साथ दिखना कबूल नहीं किया था। बाद में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मां मालती यादव का निधन 2003 में हो गया था। मुलायम अकेले पड़े तो अमर सिंह के दबाव में आकर 2007 में रिश्ते को सार्वजनिक किया। कुनबे के नजदीकी बताते हैं कि अमर सिंह को पार्टी में दुबारा लाने में शिवपाल यादव के साथ साधना गुप्ता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। फिर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव पद से आलोक रंजन हटे तो कई घोटालों में घिरे और सीबीआई जांच से जूझ रहे दीपक सिंघल को मुख्य सचिव बनवाने में भी अमर सिंह ने साधना गुप्ता का सहारा लिया। दीपक सिंघल जब अमर सिंह उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास परिषद् के अध्यक्ष थे तब प्रमुख सचिव उर्जा के नाते उनके करीबी थे। उस दौरान हुए समझौतों में दीपक सिंघल ने अमर सिंह का साथ दिया था। 2007 के बाद से सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के साथ साधना गुप्ता रहती हैं। सुप्रीमो की पत्नी साधना ने अपने पुत्र प्रतीक को जो लखनऊ में आयरन कोर फीट नामक जिम चला रहे थे और रियल स्टेट में अपनी किस्मत आजमा रहे थे को यूपी के खनन मंत्री गायत्री प्रजापति के साथ कर दिया।साधना चाहती थी कि प्रतीक राजनीति के साथ साथ अपने कारोबार में भी शिखर पर पहुंचे। साधना गुप्ता के असर की बात समझने के लिए गौरतलब है कि मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में शिवपाल सिंह यादव के पास खनन मंत्रालय था लेकिन अखिलेश के कार्यकाल में यह मंत्रालय गायत्री प्रसाद के पास आ गया। बताते हैं कि गायत्री को यह मंत्रालय साधना के दबाव ,शिवपाल के त्याग और सुप्रीमो मुलायम की जिद पर दिया गया था जबकि अखिलेश इसके लिए शुरू से तैयार नहीं थे।

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