गरीब की जोरु बन गया पाकिस्तान (9/29/16)
आलोक कुमार
नई दिल्ली। यूं तो पाकिस्तान के अंदर ड्रोन हमला आम है। अमेरिका पश्चिमी वजीरिस्तान के इलाके में जब तब ड्रोन से हमले कर दुर्दांत आतंकियों को ठिकाने लगाने का काम करता रहा है। अमेरिकी नेवी सील का मई 2011 में एट्टाबाबाद ऑपरेशन तो एतिहासिक था। जिसमें दुनिया के आतंकी नंबर वन ओसामा बिन लादेन को छिपाकर रखने वाले पाकिस्तान को मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा था। तब बुरी तरह फंसे पाकिस्तान ने अपनी संप्रभुता पर हमले को दांत निपोड़कर बेशर्मी से स्वीकार कर लिया था।
लेकिन तब करते वक्त उसे कतई उम्मीद नहीं थी कि पाकिस्तान के जीवन में 29 सितंबर 2016 की तारीख भी आने वाली है। जब भारतीय सेना के सौ कमांडो उसके अधिकार वाले कश्मीर में काल बनकर आएंगे। उसके घर में घुसकर चालीस से ज्यादा लश्करे तोइबा के आतंकवादियों को मौत के घाट उतार जाएंगे। और इसपर वह बेबस होकर कहने को मजबूर हो जाएगा कि भारत ने कोई सर्जिकल ऑपरेशन किया ही नहीं है। यह भारतीय कमांडो ऑपरेशन की खूबी रही कि उसने अमेरिकी नेवी सील की तर्ज पर पीओके ऑपरेशन की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रखी है। इसमें एलओसी से पाकिस्तान की जमीन पर लेटकर दो किलोमीटर अंदर तक का रोमांच से भरा सफर। फिर वहां स्थित लश्करे तोइबा के कैंप में सफलतापूर्वक मचाई गई तबाही। पांच जगहों पर चार घंटे तक सफलतापूर्वक ऑपरेशन को अंजाम देकर घर लौटने के जाबांजी की वीडियो फिल्म है।
भारतीय सर्जिकल ऑपरेशन से झटके में पाकिस्तान के इंकार की एकमात्र वजह है कि उसपर मंडरा रहा नया खतरा है। इस खतरे में भारत को मिली नई छूट है कि वह दो किलोमीटर से आगे भी लाहौर के मुरीदके में मौजूद हाफिज सईद या बहावलपुर में मौजूद मौलाना अजहर मसूद को ओसामा बिन लादेन की तरह का ही अंतिम अरदास करने की हौसला हासिल कर चुका है। इतना ही नहीं अफगानिस्तान मे पाकिस्तान में सार्क सम्मेलन में न जाने का फैसला सुनाते हुए कहा कि उसके यहां तबाही मचा रखे तालिबान का हेडक्वार्टर क्वेटा में है। अगर पाकिस्तान नहीं सुधरता है तो अफगानिस्तान जैसा देश भी उसके यहां अमेरिका या भारत जैसे कार्रवाई की छूट हासिल कर सकता है।
इतना ही नहीं बांग्लादेश ने भी उसके यहां युद्धबंदियों को पाकिस्तान से मिल रहे मदद पर सवाल कर बता दिया है कि आतंकपरस्त पाकिस्तान अपनी चाल में बुरी तरह घिर चुका है। अमेरिका के बाद अब भारत और भारत के बाद अफगानिस्तान या इरान उसकी धरती पर मौजूद आंतकी कैंपों पर सीधी कार्रवाई का हौसला हासिल करने वाले हैं। ऐसे में पाकिस्तान की स्थिति अपने गांव के गरीब की जोरु वाली स्थिति बन गई है, जिसे आने जाने वाला भाभी कहकर छेड़ जाया करता है।
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